
विकासार्थ विद्यार्थी ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर देश भर के 1000 से ज्यादा शिक्षा परिसरों में पक्षियों और पशुओं के लिए जल-पात्र रखकर छात्र समुदाय में प्रकृति व उसके जीव-जंतुओं के प्रति अपने कर्तव्यों का आवाह्न कर शुरुआत की है। इस अभियान के माध्यम से पक्षी मित्र, सकोरा इंचार्ज जैसे प्रयोगों के नाम से SFD केवल सकोरा लगाने का है नहीं बल्कि उन्हें गर्मियों तक नियमित भरने और उनकी साफ सफाई के लिए भी विद्यार्थियों को नियुक्त कर रही है।
एसएफडी के कार्यकर्ताओं ने देशभर में छात्रों के साथ मिलकर इस मुहिम में गर्मियों के आने के साथ ही शुरुआत की है। काशी और अवध प्रांत में सेल्फी विद परिंदा अभियान में विद्यालयी छात्र-छात्राओं की सहभागिता भी देखने को मिल रही है। दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलल नेहरू विश्विद्यालय में विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सकोरा लगाए हैं साथ ही पोस्टर्स के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी वहां के विद्यार्थी दे रहे हैं। दिल्ली विश्विद्यालय के अलग-अलग महाविद्यालयों में भी छात्र-छात्राओं में इस अभियान को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। वहां मानव श्रंखला बनाकर संदेश देना, छात्रों को क्लास-टू-क्लास जाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलवाना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

इंदौर, जबलपुर और भोपाल जैसे महानगरों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने रैली के रूप में बाहर आकर शहर भर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कर्नाटक के अलग-अलग जिला में सामान्य विद्यार्थी अपने घरों में उपयोग में लाई गई पानी की बॉटल से परिंडे तैयार करके प्लास्टिक पॉल्यूशन को भी रोकने का काम साथ में कर रहे हैं। एसएफडी ने इस पहल के माध्यम से परिसरों में छात्र समुदाय को पुनः जागृत करने का बीड़ा उठाया है, इस अभियान के द्वारा अलग-अलग प्रयोग जैसे प्लास्टिक वेस्ट से सकोरे बनाना, बॉटल्स को पुनः उपयोग करना, क्राउड फंडिंग से जन सहभागिता बढ़ाना आदि कार्य कार्यकर्ताओं ने देशभर में किए हैं। कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि विभिन्न माध्यमों से हम समुदाय के बीच पहुँचकर इस कार्य को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करते रहेंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से छात्र-छात्राओं में यह अभियान सार्थकता लिए हुए है। इसके माध्यम से भी विद्यार्थी अभियान से जुड़कर सकोरा लगाने का काम कर रहे हैं और अपनी फोटो तथा संदेश भी जागरूकता के लिए सोशल मीडिया में पोस्ट कर दूसरों को ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि स्टूडेंट फॉर डेवलपमेंट या विकासार्थ विद्यार्थी (एसएफडी), प्रतिवर्ष शैक्षणिक परिसरों में गर्मियां आते ही पक्षियों के लिए पानी के सकोरे रखने की मुहीम वर्षों से चलता आ रहा है, जिसमें अनेकों की संख्या में प्रतिवर्ष छात्र इसके साथ जुड़ते हैं। इसके अलावा पर्यावरण के अन्य महत्वपूर्ण कार्य करने की भी जिम्मेदारी वर्षों से SFD लेता आया है। भारत देश में सभी प्राणियों के प्रति अपनत्व का भाव यहाँ की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसका जीता-जागता उदाहरण हमारे साहित्य लेखन में स्पष्ट रुप से दिखाई पड़ता है। खासतौर से पक्षियों में चातक (पपीहा) नामक जीव का मनमोहक वर्णन पक्षियों के प्रति हमारे प्रेम देखभाल की परंपरा को दर्शाता है। अब ये भाव जनमानस में कहीं धुंधला होता जा रहा है जिसका परिणाम आज इन जीवों की कम होती संख्या के रूप में देखा जा सकता है। 'एक सकोरा-एक प्राण' और 'सेल्फी विद सकोरा' के नाम से यह अभियान देश के अलग-अलग प्रांतों में जनमानस के बीच लोकप्रिय हो रहा है। इस अभियान से प्रेरित होकर उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के कई जिलों में जन सामान्य और दैनिक समाचार पत्रों ने भी इसमें अपनी सहभागिता दिखाई है।